Thursday, 28 July 2011

खबर का असर... अब मिलेगी सही नकल

         शासन के करोंड़ो खर्चो के वावजूद किसान परेशान, सही नकल नही मिलती, शीर्षक से खजुराहों अधिवेंषन अवसर पर प्रकाशित स्मारिका ‘‘लाल बस्ता’’ में प्रकाशित किया गया था, जो पूर्व सहा.अधीक्षक  भू अभिलेख,विदिशा श्री रामबाबू श्रीवास्तव द्वारा लिखा गया था,  यहाँ जस का तस  दिया जा रहा है, पर शासन नें कार्यवाही की और  विदिशा  को सबसे पहले "माडल पायलट प्रोजेक्ट" के लिये चयन किया। 

अब मिलेगी कृषको को सही नकल।

         पटवारी खसरा कम्प्यूटरीकरण का कार्य 1994 से चल रहा है, किन्तु पटवारी खसरा के 12 खानों का अपडे़शन कार्य 15 वर्षो में भी पूर्ण नहीं हो सका है।
         तहसील से प्रतिमाह पटवारी खसरा के अपडेशन का प्रमाण पत्र ऊपर भेजा जाता है, लेकिन फिर भी जब कोई कृषक नकल निकलवाने आता है, तब सही नकल नहीं मिलती। तब पटवारी को बुलाकार सत्यापन कराया जाता है। ऐसें में कम्प्यूटरीकरण का क्या औचित्य है जबकि सिर्फ कम्प्यूटीकृत नकल देने के लिए शासन प्रतिवर्ष करोंड़ों रूपया कम्प्यूटर रख-रखाव, वेतन, भत्ते आदि पर व्यय कर रहा है। इन करोड़ों रूपयों का दुरूपयोग हो रहा है।
         यह भी उल्लेखनीय है कि
इंटरनेट बैकिंग/ए.टी.एम. द्वारा जमा/निकासी का प्रतिपल परिवर्तन के बाबजूद अद्यतन हिसाब रखा जाता है और विश्वसनीय भी होता है। बैंको में एक दिन के परिवर्तन के बराबर राजस्व भू-अभिलेख में परिवर्तन माह में भी नही होता फिर भी अपडेट नहीं हो पाता। विचारणीय है, क्या कारण है कि बम्बई में रूपयें जमा कर दिल्ली में हिसाब कर सकते हैं, किन्तु तहसील कार्यालय में लगे हुये कमरें में रिकार्ड संशोधन नहीं हो पाता?आखिर अपडेशन कार्य क्यों नहीं हो पा रहा है?
 शायद इसलियें क्योकिं गलत नकल निकलने में ही कम्प्यूटर आपरेटर या अन्य 


 नकल देने वालों को लाभ है, इसलिये वह रूचि नहीं लेते, और इनके ऊपर के लोगों को भी यह बात केवल अपना नफा-नुकसान पर ही सिमटकर रह जाती है। परिणाम शासन के प्रतिवर्ष करोडों खर्च के बाबजूद किसान परेशान है और शासन घाटे में।
         शासन इस मामलें को गंभीरता से ले और पटवारियों से खसरा बी-1 लेखन बंद करवाकर उन्हें कम्प्यूटीकृत खसरा बी-1, सेट प्रदाय करें। समय पर होने वाले संशोधन के आदेश भी पटवारी के साथ सीधें कम्प्यूटर में अमल के लिये जाने लगें तो एक ओर जहां किसान 
को सही नकल मिलेगी, शासन की कृषक हित की  मंशा पूरी होगीं, वहीं दूसरी ओर पटवारी के काम का बोझ कुछ कम होगा, समय बचेगा इस बचे हुये समय में पटवारी को गश्त/वसूली कार्य आदि में लगाया जाकर शासन हित में लाभ अर्जित किया जा सकता  है। 
... लेकिन आज भी स्थिति में कोई ठोस सुधार नहीं हो सका और किसान परेशान हैै।  


 .....   www.mppatwari.com

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